राम जन्मभूमि में ज्योतिस्वरूप कलाकृति पर शंकराचार्य की आपत्ति

हरिद्वार। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखकर अयोध्या में स्थापित ‘ज्योतिस्वरूप’ कलाकृति पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे शास्त्रीय मर्यादाओं के विपरीत बताते हुए तत्काल पुनर्विचार की आवश्यकता बताई। शंकराचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि का मूल स्थान अत्यंत पवित्र और संवेदनशील है, जहां गर्भगृह की स्थिति शास्त्रों के अनुसार अपरिवर्तनीय मानी जाती है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या वर्तमान गर्भगृह मूल जन्मस्थल से भिन्न स्थान पर निर्मित है, जो परंपरा के विरुद्ध हो सकता है। ‘ज्योतिस्वरूप’ कलाकृति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केवल पीतल से बनी आकृति को ज्योति कहना शास्त्रसम्मत नहीं है, क्योंकि वास्तविक ज्योति घी या तेल के दीपक से ही मानी जाती है। उन्होंने ट्रस्ट से इस कलाकृति को हटाकर विधि-विधान से दीप स्थापना करने और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।