‘हरिद्वार कभी नहीं छोड़ूंगा!’ : हरीश रावत 

‘हरिद्वार कभी नहीं छोड़ूंगा!’ : हरीश रावत 
 
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो/ कुमार दुष्यंत 
 
 
हरिद्वार। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि हरिद्वार में उनकी आत्मा बसती है, इसलिए हरिद्वार को वह कभी नहीं छोड़ने वाले।
परिवारवाद के आरोपों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके बच्चे अपनी काबिलियत के बल पर राजनीति में अपनी जगह बना रहे हैं।
इस संवाददाता के साथ एक विशेष भेंटवार्ता में स्वयं को ‘हरिद्वारी लाल’, ‘हरिद्वार का प्रेमी’ कहे जाने के विरोधियों के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने कहा कि हरिद्वार की जनता ने उन्हें अपार प्रेम दिया है, जिसके लिए वह हरिद्वार के शुक्रगुजार हैं। जो उन्हें हरिद्वारी लाल कहते हैं इसमें उनके अपने स्वार्थ हैं, उनके कह देने भर से वह हरिद्वार नहीं छोड़ने वाले। हरिद्वार उनके दिल में बसता है और हरिद्वार में उनकी आत्मा। इसलिए हरिद्वार को वह मरते दम तक नहीं छोड़ेंगे।
 परिवारवाद के आरोपों को नकारते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बच्चों से कह रखा रखा है कि वह राजनीति के लिए वह क्षेत्र चुनें जहां पार्टी के पास दूसरे विकल्प न हों। रावत ने कहा हरिद्वार ग्रामीण में कांग्रेस कभी नहीं जीती, अनुपमा ने यहां खुद अपनी जगह बनाई। वीरेंद्र ने पहले ही प्रयास में पार्टी के लिए सम्मानजनक प्रदर्शन किया। ये उनकी अपनी काबिलियत है। कुछ समर्थकों द्वारा साथ छोड़ने के सवाल पर रावत ने कहा कि वह वो लोग थे जो अपने निजी एजेंडे के लिए उनके साथ थे, उन्होंने उनको बहुत कुछ दिया लेकिन जब ओर महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं हुई तो वह साथ छोड़ गए, उन्हें समर्थक नहीं कहा जा सकता।
रावत ने अपने नेतृत्व में लड़े गए चुनावों में पार्टी की हार को उत्तराखंडियत की हार बताया। उन्होंने कहा कि समग्र उत्तराखंड के विकास का जो उनका माडल था वह उसे जनता को समझा नहीं पाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लिए काम करने के लिए मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें बहुत कम वक्त मिला।
राजनीति से संन्यास के सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि जबतक उनकी पार्टी के लिए,प्रदेश की जनता के लिए उनकी उपयोगिता है वह सक्रिय बने रहेंगे। उन्होंने कहा राज्य का गठन जिन आकांक्षाओं के साथ हुआ था वह पूरी नहीं हुई। राज्य के पास आज भी विकास का अपना कोई माडल नहीं है। हमारी अर्थव्यवस्था पच्चीस साल बाद भी राज्य आधारित न होकर केंद्र पर निर्भर है। पलायन से आज भी राज्य खोखला हो रहा है।

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