भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और वैदिक जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रही है गाय: शंकराचार्य

भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और वैदिक जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रही है गाय: शंकराचार्य
 
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
 
देहरादून/आगरा। आगरा और फिरोजाबाद में आयोजित विभिन्न जनसभाओं में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण को सनातन समाज का महत्वपूर्ण दायित्व बताते हुए लोगों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और वैदिक जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रही है तथा इसके संरक्षण के लिए समाज को संगठित प्रयास करने चाहिए।
सिकंदरा स्थित बजरंग कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने गौभक्तों को गौ रक्षा का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर उन्होंने सचिन चतुर्वेदी को आगरा परिक्षेत्र के लिए अपना प्रतिनिधि घोषित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गौभक्त उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि गाय का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि घी, दूध, गोबर और गोमूत्र का उपयोग भारतीय परंपरा में लंबे समय से होता रहा है और इन्हें सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
उन्होंने गौवंश की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज और सरकार से संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जागरूक भागीदारी निभाने तथा जनप्रतिनिधियों से गौ संरक्षण संबंधी नीतियों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने गौ संरक्षण, भारतीय परंपराओं और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा मुद्दा भी है। जनसभाओं में उपस्थित लोगों ने गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया।

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