हरिद्वार में मजदूर आंदोलन के समर्थन में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन, दमन के विरोध में सौंपा ज्ञापन

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
हरिद्वार। विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मजदूर संगठनों और राजनीतिक संगठनों ने रविवार को मजदूर आंदोलन के कथित दमन के विरोध में हरिद्वार की पुरानी तहसील स्थित सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया। संगठनों ने मुख्यमंत्री समेत अन्य सक्षम अधिकारियों को सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए उन्हें तत्काल पूरा करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि उद्योगों में लंबे समय से मजदूरों का भयावह शोषण, उत्पीड़न, लंबे कार्य घंटे और नारकीय जीवन परिस्थितियां बनी हुई हैं। इन्हीं हालातों ने मजदूरों को आंदोलन के लिए मजबूर किया है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उद्योग प्रबंधन कमजोर श्रम कानूनों और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को आज भी न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल पा रहा है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन के दबाव में सरकार ने न्यूनतम वेतन में मामूली वृद्धि तो की, लेकिन कई कंपनियां अब भी इसे लागू नहीं कर रही हैं। मजदूर संगठनों ने महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने तथा उसी अनुपात में बोनस और अन्य सुविधाएं देने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन किसी के उकसावे से नहीं बल्कि शोषण और खराब जीवन परिस्थितियों के कारण पैदा होते हैं। इसके लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेंगे।
संगठनों ने मजदूर आंदोलन के दौरान कथित बर्बर दमन, मजदूरों की अवैध हिरासत और मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं की नजरबंदी की आलोचना की। साथ ही गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई और मजदूरों व संगठन के कार्यकर्ताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
कार्यक्रम में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, प्रगतिशील भोजन माता संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जन अधिकार संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि उद्योगों में लंबे समय से मजदूरों का भयावह शोषण, उत्पीड़न, लंबे कार्य घंटे और नारकीय जीवन परिस्थितियां बनी हुई हैं। इन्हीं हालातों ने मजदूरों को आंदोलन के लिए मजबूर किया है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उद्योग प्रबंधन कमजोर श्रम कानूनों और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को आज भी न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल पा रहा है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन के दबाव में सरकार ने न्यूनतम वेतन में मामूली वृद्धि तो की, लेकिन कई कंपनियां अब भी इसे लागू नहीं कर रही हैं। मजदूर संगठनों ने महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने तथा उसी अनुपात में बोनस और अन्य सुविधाएं देने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन किसी के उकसावे से नहीं बल्कि शोषण और खराब जीवन परिस्थितियों के कारण पैदा होते हैं। इसके लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेंगे।
संगठनों ने मजदूर आंदोलन के दौरान कथित बर्बर दमन, मजदूरों की अवैध हिरासत और मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं की नजरबंदी की आलोचना की। साथ ही गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई और मजदूरों व संगठन के कार्यकर्ताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
कार्यक्रम में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, प्रगतिशील भोजन माता संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जन अधिकार संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।