डिजिटल युग में लोकसंस्कृति के संरक्षण और वैश्विक प्रसार पर हुआ मंथन

डिजिटल युग में लोकसंस्कृति के संरक्षण और वैश्विक प्रसार पर हुआ मंथन


श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर’ का समापन हुआ। दूसरे दिन लोकसंस्कृति के संरक्षण, संवर्धन, नवाचार और वैश्विक प्रसार पर मंथन किया गया।
लोककलाकार अरविंद चौहान और अनुराग नौटियाल ने प्रस्तुतियों के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता के समन्वय को आवश्यक बताया। डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि डिजिटल युग उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। समापन सत्र में लोकगायिका अंजली खरे और लोकगायक सचिन पुसौला की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रेवानी ने लोकसंस्कृति के दस्तावेजीकरण और डिजिटल अभिलेखीकरण पर जोर दिया। प्रो. ओ.पी. गुसाईं ने युवाओं को अपनी जड़ों, भाषा और लोकपरंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई। प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी ने डिजिटल माध्यमों को लोकसंस्कृति के संरक्षण और प्रसार का सशक्त साधन बताया। संगोष्ठी में शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *