गोठी मेले में दिखा देव परंपरा और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम

टिहरी गढ़वाल। जौनपुर क्षेत्र के प्राचीन देवस्थल देवीथात में श्रावण मास की 15 गते आयोजित गोठी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां गौरजा और भगवान नागराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार भगवान नागराज अपने सिद्धधाम नागटिब्बा से मां गौरजा से मिलने यहां आते हैं, जिससे यह मेला विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मेले की अनूठी परंपरा के तहत ग्वाल-बाल मिट्टी से नागदेवता का स्वरूप बनाकर पूजा-अर्चना करते हैं और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सैनिक एवं ग्राम प्रधान सुनील सेमवाल ने बताया कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस मेले में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। देवदार, बांज और बुरांश के जंगलों से घिरा देवीथात आज भी उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और देव परंपराओं का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।