5.82 करोड़ के टेंडर को लेकर नगर निगम रुड़की में घमासान, पार्षदों का प्रदर्शन

हरिद्वार/रुड़की। नगर निगम में 5.82 करोड़ रुपये के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) टेंडर को लेकर सोमवार को विवाद गहरा गया। बड़ी संख्या में पार्षद नगर आयुक्त कार्यालय पहुंचे और टेंडर प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान महापौर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पार्षदों ने टेंडर को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी पार्षदों का आरोप है कि निगम की विभिन्न समितियों के गठन से पहले ही करोड़ों रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया। उनका कहना है कि अधिकांश पार्षदों को टेंडर प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि जल्दबाजी में प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज किया गया। इस संबंध में नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर टेंडर निरस्त करने तथा समितियों के गठन के बाद मामले पर पुनर्विचार की मांग की गई।
पार्षदों ने यह भी कहा कि बरसात के मौसम में शहर के कई वार्ड सड़क, नालों की सफाई और जलभराव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में नगर निगम को मूलभूत नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, मेयर प्रतिनिधि ललित मोहन अग्रवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित यह टेंडर सामान्य टेंडरों से अलग है और इसकी प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के टेंडर वर्षों से निर्धारित नियमों के तहत जारी होते रहे हैं और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक कदम है।
फिलहाल इस टेंडर को लेकर नगर निगम की राजनीति गरमा गई है। एक ओर पार्षद टेंडर रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर मेयर पक्ष इसे नियमसम्मत और जनहित में आवश्यक बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
प्रदर्शनकारी पार्षदों का आरोप है कि निगम की विभिन्न समितियों के गठन से पहले ही करोड़ों रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया। उनका कहना है कि अधिकांश पार्षदों को टेंडर प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि जल्दबाजी में प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज किया गया। इस संबंध में नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर टेंडर निरस्त करने तथा समितियों के गठन के बाद मामले पर पुनर्विचार की मांग की गई।
पार्षदों ने यह भी कहा कि बरसात के मौसम में शहर के कई वार्ड सड़क, नालों की सफाई और जलभराव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में नगर निगम को मूलभूत नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, मेयर प्रतिनिधि ललित मोहन अग्रवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित यह टेंडर सामान्य टेंडरों से अलग है और इसकी प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के टेंडर वर्षों से निर्धारित नियमों के तहत जारी होते रहे हैं और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक कदम है।
फिलहाल इस टेंडर को लेकर नगर निगम की राजनीति गरमा गई है। एक ओर पार्षद टेंडर रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर मेयर पक्ष इसे नियमसम्मत और जनहित में आवश्यक बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।