त्याग, तपस्या और सिद्धांतों की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन स्वामी हंसप्रकाश महाराज

त्याग, तपस्या और सिद्धांतों की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन स्वामी हंसप्रकाश महाराज
हरिद्वार। ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी हंसप्रकाश महाराज का त्रयोदस निर्वाण दिवस प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने की।
उन्होंने कहा कि स्वामी हंसप्रकाश महाराज त्याग, तपस्या और सिद्धांतों की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सनातन धर्म और उसकी परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर संत सम्मेलन एवं श्रीरामचरितमानस अखंड पाठ का आयोजन किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर मानव कल्याण में योगदान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में अनेक संत-महापुरुष, जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने ब्रह्मलीन संत के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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