थराली सीएचसी में दवा निस्तारण पर उठे सवाल, जांच के आदेश

थराली सीएचसी में दवा निस्तारण पर उठे सवाल, जांच के आदेश


उत्तराखंड ब्यूरो/हरेंद्र बिष्ट।

थराली (चमोली)। एक ओर सरकार द्वारा प्रदेश के अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले थराली परगना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में दवाओं के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में जले हुए दवा पैकेट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में सीएचसी थराली के समीप भारी मात्रा में जले हुए दवा पैकेट पाए गए, जिन पर सरकारी मुहर होने की बात भी सामने आई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि ये दवाएं सरकारी स्टॉक की थीं तो इन्हें किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में नष्ट किया गया। यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि क्या ये दवाएं वास्तव में एक्सपायर हो चुकी थीं या फिर उपयोग योग्य दवाओं का अनुचित तरीके से निस्तारण किया गया।

प्रदेश सरकार द्वारा मरीजों और प्रसूताओं को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दवाएं उपयोग योग्य थीं तो उन्हें अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भेजकर उपयोग किया जा सकता था।

सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि “चिकित्सालय के डस्टबिन में खाली दवा के डिब्बे अधिक हो गए थे, जिन्हें जलाया गया। हालांकि कुछ डिब्बों में दवाओं के अवशेष दिखाई दे रहे हैं, यह जांच का विषय है।”

वहीं प्रभारी चीफ फार्मासिस्ट गिरीश टम्टा ने कहा कि कूड़ा वाहन समय पर नहीं आने और सफाई कर्मचारी के अनुपस्थित रहने के कारण खाली रैपर जलाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जलाए जा रहे खाली डिब्बों में किसी ने दवा वाले पैकेट मिला दिए, जिससे मामले को गलत रूप दिया जा सके।

उधर, सीएमओ चमोली डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि दवाओं के डिब्बों को खुले में जलाना नियम विरुद्ध है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है, जो जांच आख्या प्रस्तुत करेगी। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *