सड़क हादसे बढ़े, किसान परेशान, गौशाला निर्माण की उठी मांग

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
̤हल्द्वानी। गौलापार, किशनपुर, रामबाग, लालकुआं तथा हल्द्वानी के मंगल पड़ाव समेत विभिन्न क्षेत्रों में आवारा गौवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु अब आम जनता, किसानों और वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन चुके हैं। आए दिन इन पशुओं के सड़क पर अचानक आ जाने से दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोग घायल हो चुके हैं। विशेषकर रात के समय दोपहिया वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे बैठे अथवा अचानक सड़क पार करते गौवंश के कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कई बार तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर से पशुओं की भी मौत हो जाती है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
इधर आवारा पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खेतों में घुसकर गौवंश सब्जियों, गेहूं, धान एवं अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसानों का कहना है कि रातभर खेतों की रखवाली करने के बावजूद फसल बचाना मुश्किल हो गया है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र जागी ने कहा कि गौलापार क्षेत्र में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और अब यहां एक बड़ी गौशाला का निर्माण बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के सहयोग से कई बार आवारा पशुओं को हल्दूचौड़ स्थित गौधाम भेजा गया, लेकिन वहां भी जगह की कमी के कारण सभी पशुओं को नहीं रखा जा सकता।
वहीं क्षेत्र के प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश दुर्गापाल ने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने पशुओं को आवारा न छोड़ें। उन्होंने कहा कि गौ सेवा सबसे बड़ा परोपकार है और पशुपालकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
उधर वन्दे मातरम् ग्रुप के शैलेन्द्र दानू द्वारा रात में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सराहनीय पहल की जा रही है। उनके द्वारा आवारा पशुओं के गले में पेपर रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं, ताकि रात के अंधेरे में वाहन चालकों को पशु दूर से दिखाई दे सकें और दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा गौवंश की समस्या के समाधान हेतु स्थायी गौशालाओं का निर्माण कराया जाए, पशुपालकों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं तथा सड़कों पर घूम रहे पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, जिससे आम जनता, किसानों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।