खाकी से खेती तक: राष्ट्रपति पदक विजेता गोपाल बिष्ट जैविक खेती से बन रहे प्रेरणा

खाकी से खेती तक: राष्ट्रपति पदक विजेता गोपाल बिष्ट जैविक खेती से बन रहे प्रेरणा


भवाली/भीमताल। गोपाल बिष्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद जैविक खेती को अपनाकर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा पेश की है। उत्तराखंड अग्निशमन सेवा में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले गोपाल बिष्ट आज भवाली और भीमताल क्षेत्र में पूरी तरह रसायनमुक्त पारंपरिक खेती कर शुद्ध फल एवं सब्जियां उगा रहे हैं।
गोपाल बिष्ट को वर्ष 2015 में उत्कृष्ट कार्य और कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा पदक से सम्मानित किया गया था। वहीं वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड द्वारा उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रशंसा एवं कांस्य डिस्क सम्मान भी मिला। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खेती को स्वरोजगार और समाजसेवा का माध्यम बनाया। वे स्थानीय लोगों को जंगलों में आग की घटनाओं के प्रति भी लगातार जागरूक कर रहे हैं। उनका मानना है कि जैविक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम है।
गोपाल बिष्ट की पहल पहाड़ों में युवाओं को खेती और स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर रही है। वे पारंपरिक खेती को आधुनिक सोच से जोड़ते हुए यह संदेश दे रहे हैं कि सेवा केवल वर्दी तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का निरंतर प्रयास है।

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