भाजपा की नींव कमजोर, विकास कार्यों के नाम पर झूठ का पुलिंदा

प्रमोद खारी लक्सर से उतरेंगे विस चुनाव में, भाजपा के कई हजार परिवार संपर्क में  
 

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / जोगेंद्र मावी,
हरिद्वार। सांसद त्रिवेंद्र रावत की कुनीतियों, कुछ लोगों की कठपुतली बनकर काम करने, विकास कार्यों से कोसो दूर रहने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद खारी ने पार्टी का दामन छोड़ दिया। समर्थकों के साथ प्रमोद खारी ने कहा कि भाजपा की नींव कमजोर है। पार्टी का जनाधार घटता जा रह है। अपने को वरिष्ठ नेता कहलाने वाले और निर्वाचित सांसद का विकास कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। लक्सर क्षेत्र विकास कार्यों से कोसो दूर है। अब वे देवभूमि अधिकार मंच के बैनर तले जनता की समस्याओं का समाधान कराते हुए विधानसभा चुनाव मैदान में उतरेंगे।
देवभूमि अधिकार मंच के संयोजक प्रमोद खारी ने भाजपा से इस्तीफे की घोषणा करते हुए लक्सर से विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान प्रमोद खारी ने कहा कि सरकार और संगठन के स्तर पर जनसमस्याओं को रखने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने निराशा हताशा के बाद दुखी मन से भाजपा से इस्तीफा दिया है। प्रमोद खारी ने बताया कि स्थानीय सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष भी जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया। लेकिन उनका भी कोई सहयोग नहीं मिला। खारी ने कहा कि वे जन सेवा के लिए राजनीति में आए हैं। लेकिन जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार एवं शासन गंभीर नहीं है। लक्सर क्षेत्र की जनता की पीड़ा को लेकर हमेशा ही शासन प्रशासन को अवगत कराया गया। लेकिन मात्र आश्वासन ही। डबल इंजन सरकार में भी लोगों की समस्याओं का समाधान ना होना सरकार की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि उन्हें पद ओर टिकट की कोई लालसा नहीं है। लक्सर की जनता का आशीर्वाद उनके साथ है और आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। प्रमोद खारी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दौरे के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा की गई गतिविधियों पर सवाल खड़े किए और कहा कि विपक्ष को भी बोलने का अधिकार है। उनके साथ पहुंचे भाजपा नेता नमन गोस्वामी ने भी भाजपा छोड़ने का ऐलान किया।
लक्सर पालिका चुनाव हारे
प्रमोद खारी ने कहा कि भाजपा की राज्य सत्ता होने के बावजूद लक्सर नगरपालिका का चुनाव पार्टी हार गई। कारण विकास कार्य न कराना रहा और ऐसा प्रत्याशी मैदान में उतारा, जिसका कोई जनाधार और जनता से किसी प्रकार का वास्ता नहीं था। समझाने के बावजूद भी वरिष्ठ नेताओं ने उनकी बात नहीं मानी और हार का मुंह देखना पड़ा। यही हाल आगामी विधानसभा चुनाव— 2027 में भी हाल होगा। 

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