आधुनिक शिक्षा से जुड़ेंगे विद्यार्थी, गरीबी को नहीं बनने देंगे पढ़ाई में बाधा: डॉ. धन सिंह

श्रीनगर। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर में पर्सनलाइज्ड एडैप्टिव लर्निंग लैब एवं अटल लैब का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है और किसी भी छात्र-छात्रा की आर्थिक स्थिति को उसकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
डॉ. रावत ने कहा कि नई लैब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक, रोबोटिक्स और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोगात्मक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि लगभग 75 लाख रुपये की लागत से इन आधुनिक लैब्स को तैयार किया गया है, जबकि इंटर कॉलेज के विकास कार्यों के लिए 81 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, रोजगारपरक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है ताकि युवा पीढ़ी भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सके। कार्यक्रम में उन्होंने अभिभावकों से विद्यालयों में आयोजित मासिक बैठकों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। साथ ही विद्यालय प्रशासन को सुझाव दिया कि विद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाए, जिससे वे विद्यालय के विकास में सहयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व छात्र अपने विद्यालय को गोद लेकर उसके विकास में योगदान दें तो इससे शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
अपने भ्रमण के दौरान डॉ. रावत ने कंसमर्दनी, तिवारी मोहल्ला, ट्रेजरी मोहल्ला और गणेश बाजार क्षेत्र में जनसंपर्क कर स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इसके अलावा उन्होंने पौड़ी-खिर्सू-श्रीनगर मोटर मार्ग से कोल्ठा गांव तक द्वितीय चरण मोटर मार्ग निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। लगभग 79.51 लाख रुपये की लागत और दो किलोमीटर लंबाई वाले इस मार्ग से ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।
उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज मरखोड़ा में इंटरलॉकिंग टाइल्स मार्ग, भवन सौंदर्यीकरण, शौचालय निर्माण और भवन मरम्मत सहित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। डॉ. रावत ने कहा कि विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत कर विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।