कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता का भाव रखें मनुष्य: आचार्य ममगाईं

श्रीनगर गढ़वाल। कंस मर्दनी मार्ग स्थित मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को कृष्ण-सुदामा, नव योगेश्वर और जनक प्रसंग के साथ समापन हुआ। जोशी परिवार की ओर से आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
कथावाचक आचार्य पं. शिव प्रसाद ममगाईं ने श्रद्धालुओं से कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता, भक्ति और सत्कर्मों का भाव अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य में सद्गुण, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का विकास होता है। विचारों में बदलाव आने से आचरण भी बदलता है। उन्होंने कहा कि कथा और यज्ञ मन, बुद्धि तथा चित्त को निर्मल करते हैं। मनुष्य शरीर भगवान का दिया श्रेष्ठ प्रसाद है, इसलिए जीवन में प्रसाद का सम्मान करना चाहिए। समापन पर यजमान परिवार ने कथा व्यास और आचार्यों को सम्मानपूर्वक विदाई दी। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।