दूर दूर तक पहुंचती है इन गाँवों की उगायी हुई सब्जियां

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / भुवन बिष्ट,
रानीखेत। देवभूमि उत्तराखंड का कण कण महान है अपनी महानता को समेटे हुए इसके गाँव विभिन्न सब्जियों, फलों के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। अल्मोड़ा जिले के विकासखण्ड ताड़ीखेत के अनेक गाँव अपने सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। विशेषकर बेल वाली सब्जियां जिसमें लौकी, तुरई, ककडी़,करेला आदि के साथ साथ मूली, बैंगन, शिमला मिर्च बीन आदि के उत्पादन के लिए भी यह क्षेत्र जाना जाता है। इस समय यहाँ पर वृहद मात्रा में सब्जी का उत्पादन होता है और दूर दूर तक यहाँ की सब्जियां अपने स्वाद को बिखेरती हैं।
आज भले ही गांवों से पलायन जारी हो किन्तु अनेक गाँव आज भी सब्जी, अनाज, फल उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। अनेक गाँव गोभी, मटर, मिर्च के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं तो दूसरी ओर देवभूमि के अनेक गाँव फल उत्पादन के लिए भी जाने जाते हैं देवभूमि के इन गाँवों की फल सब्जियां जहां दूर दूर तक मंडियों तक पहुंचती हैं और विभिन्न राज्यों तक अपनी महक को पहुंचाने में सफल रहती हैं। जनवरी माह से सब्जियों के पौध तैयार करने का क्रम इन गाँवों में शुरू हो जाता है वहीं दूसरी ओर सब्जियों के खेत तैयार करने का कार्य भी इन दिनों प्रगति पर है। देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ के अनेक गाँव आज भी अपनी अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ताड़ीखेत विकासखण्ड के मौना, मकड़ो, मंगचौड़ा, चौकुनी, चमना,गढोली, बिष्टकोटुली, नावली, म्वाण, बनोलिया तथा मटेला आदि गाँव अपने सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। मार्च से जुलाई अगस्त महिने तक इन गाँवों में बेल वाली सब्जियां विशेषकर प्रसिद्ध रहती हैं जिसमें मुख्यतः ककड़ी, लौकी, तुरई, करेला आदि प्रसिद्ध हैं इसके अलावा इस समय कददू ,मूली का भी उत्पादन काफी मात्रा में होता है और इन ताजी सब्जियों की मांग भी काफी मात्रा में होती है। इन गांँवों में वर्ष भर अलग अलग सब्जीयों का उत्पादन होता है। सब्जी उत्पादन में प्रसिद्ध इन गाँवों में जनवरी माह से ही खेतों को सब्जी के लिए तैयार करना व बीज बोने आदि का कार्य प्रारंभ हो जाता है तथा क्यारीयां बनाकर खेतों को तैयार किया जाता है तथा मार्च अप्रेल माह में लौकी, ककडी़(खीरा), कद्दू, मूली, तुरई, बैंगन, बीन,शिमला मिर्च, पालक,लहसुन, प्याज आदि का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है। इन सब्जियों को गाँव के उत्पादकों द्वारा स्थानीय बाजारों के अलावा दूर दूर तक भेजा जाता है। रानीखेत बाजार में इन गाँवों की ताजी सब्जियों के खरीददारों की सदैव भीड़ रहती है। तथा घिंघारीखाल और गगास में भी इन सब्जियों का भंडार देखा जा सकता है जहां से खरीददार दूर दूर के लिए भी इन सब्जियों को खरीदकर ले जाते हैं। इन गाँवों की सब्जियों को उत्पादकों द्वारा चौखुटिया, कर्णप्रयाग, द्वाराहाट, कफडा, सोमेश्वर, गरूड़ आदि दूर दूर स्थानों तक भेजा जाता है। इन गाँवों की प्रसिद्ध सब्जियों की दूर दूर तक काफी मांग रहती है और सब्जी उत्पादकों द्वारा इसकी पूर्ती की जाती है।
आज भले ही गांवों से पलायन जारी हो किन्तु अनेक गाँव आज भी सब्जी, अनाज, फल उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। अनेक गाँव गोभी, मटर, मिर्च के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं तो दूसरी ओर देवभूमि के अनेक गाँव फल उत्पादन के लिए भी जाने जाते हैं देवभूमि के इन गाँवों की फल सब्जियां जहां दूर दूर तक मंडियों तक पहुंचती हैं और विभिन्न राज्यों तक अपनी महक को पहुंचाने में सफल रहती हैं। जनवरी माह से सब्जियों के पौध तैयार करने का क्रम इन गाँवों में शुरू हो जाता है वहीं दूसरी ओर सब्जियों के खेत तैयार करने का कार्य भी इन दिनों प्रगति पर है। देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ के अनेक गाँव आज भी अपनी अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ताड़ीखेत विकासखण्ड के मौना, मकड़ो, मंगचौड़ा, चौकुनी, चमना,गढोली, बिष्टकोटुली, नावली, म्वाण, बनोलिया तथा मटेला आदि गाँव अपने सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। मार्च से जुलाई अगस्त महिने तक इन गाँवों में बेल वाली सब्जियां विशेषकर प्रसिद्ध रहती हैं जिसमें मुख्यतः ककड़ी, लौकी, तुरई, करेला आदि प्रसिद्ध हैं इसके अलावा इस समय कददू ,मूली का भी उत्पादन काफी मात्रा में होता है और इन ताजी सब्जियों की मांग भी काफी मात्रा में होती है। इन गांँवों में वर्ष भर अलग अलग सब्जीयों का उत्पादन होता है। सब्जी उत्पादन में प्रसिद्ध इन गाँवों में जनवरी माह से ही खेतों को सब्जी के लिए तैयार करना व बीज बोने आदि का कार्य प्रारंभ हो जाता है तथा क्यारीयां बनाकर खेतों को तैयार किया जाता है तथा मार्च अप्रेल माह में लौकी, ककडी़(खीरा), कद्दू, मूली, तुरई, बैंगन, बीन,शिमला मिर्च, पालक,लहसुन, प्याज आदि का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है। इन सब्जियों को गाँव के उत्पादकों द्वारा स्थानीय बाजारों के अलावा दूर दूर तक भेजा जाता है। रानीखेत बाजार में इन गाँवों की ताजी सब्जियों के खरीददारों की सदैव भीड़ रहती है। तथा घिंघारीखाल और गगास में भी इन सब्जियों का भंडार देखा जा सकता है जहां से खरीददार दूर दूर के लिए भी इन सब्जियों को खरीदकर ले जाते हैं। इन गाँवों की सब्जियों को उत्पादकों द्वारा चौखुटिया, कर्णप्रयाग, द्वाराहाट, कफडा, सोमेश्वर, गरूड़ आदि दूर दूर स्थानों तक भेजा जाता है। इन गाँवों की प्रसिद्ध सब्जियों की दूर दूर तक काफी मांग रहती है और सब्जी उत्पादकों द्वारा इसकी पूर्ती की जाती है।
प्रसिद्ध हैं विकासखण्ड के ये गांव
ताड़ीखेत विकासखण्ड के मौना, मकड़ो, मंगचौड़ा, चौकुनी, चमना, गढोली, बिष्टकोटुली, नावली, म्वाण,बनोलिया तथा द्वाराहाट ब्लाक का मटेला गाँव अपने सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
दूर दूर तक पहुंचती हैं इन गांवों की उगायी हुई सब्जियां
इन गाँवों की सब्जियों को उत्पादकों द्वारा चौखुटिया, कर्णप्रयाग, द्वाराहाट, कफडा, सोमेश्वर, गरूड़ आदि दूर दूर स्थानों तक भेजा जाता है। इन गाँवों की प्रसिद्ध सब्जियों की दूर दूर तक काफी मांग रहती है और सब्जी उत्पादकों द्वारा इसकी पूर्ती की जाती है। सब्जी उत्पादन के द्वारा कृषक अपनी खेती बाड़ी, उद्यान पर आत्मनिर्भर भी होते हैं। यह रोजगार का भी एक सशक्त माध्यम होता है।