22वें आत्मरस कीर्तन दरबार में संगत हुई निहाल

22वें आत्मरस कीर्तन दरबार में संगत हुई निहाल


हरिद्वार। कनखल स्थित निर्मल संतपुरा में 22वां आत्मरस महान कीर्तन दरबार (गुरमत समागम) श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। 71 वर्षों से चली आ रही तीन दिवसीय अखंड पाठ की परंपरा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका। डॉ. अलंकार सिंह, भाई जसपाल सिंह, भाई हरजिंदर सिंह खालसा व सरबजीत कौर ने शब्द कीर्तन से संगत को भावविभोर किया। संत जगजीत सिंह शास्त्री ने गुरुजनों के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। समागम में रक्तदान शिविर भी लगाया गया और अनेक संत-महंत उपस्थित रहे।

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