सहकारी व्यापार मेले में आईसीएआर ने प्रदर्शित की नवाचारी मत्स्य पालन तकनीकें

देहरादून। आईसीएआर, भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुरुगानंदम ने देहरादून में आयोजित सहकारी व्यापार मेले में पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन और एकीकृत कृषि प्रणालियों पर आधारित नवाचारी तकनीकों को प्रस्तुत किया। उन्होंने घराटों से ऑक्सीजन-समृद्ध जल और अनाज पिसाई के जैविक अवशेषों का उपयोग तालाबों में करने की अभिनव अवधारणा पेश की, जिससे 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में 45-50 किलोग्राम मछली उत्पादन संभव हुआ।
उन्होंने सुधारित कार्प मत्स्य पालन तकनीकों, बीज संचयन घनत्व, कटाई कैलेंडर और धानदृमत्स्य पालन प्रणाली पर प्रकाश डाला। धान खेतों में केवल 4 प्रतिशत क्षेत्र शरण संरचनाओं हेतु आवंटित करने से 600-900 किग्रा मछली प्रति हेक्टेयर उत्पादन और धान उत्पादन में 15-20 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई।
सत्र में फार्म तालाबों के डिज़ाइन, जलगुणवत्ता प्रबंधन, मत्स्य रोग नियंत्रण, परिष्कृत मत्स्य बीज और जीवित मछली परिवहन तकनीक, बायोफ्लॉक तकनीक एवं पशुधन आधारित उद्यमों को भी प्रदर्शित किया गया। डॉ. मुरुगानंदम ने स्थायी मत्स्य प्रथाओं का समर्थन करते हुए किशोर मछलियों, छोटे जाल और विषैले रसायनों के प्रयोग से बचने का आह्वान किया।