सहकारिता विभाग में प्रशासनिक ढांचे के सुधार को उठाए ऐतिहासिक कदम

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। राज्य गठन के उपरांत सहकारिता विभाग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। बीते 25 वर्षों में विभाग ने किसानों, महिलाओं, काश्तकारों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कई अभिनव योजनाएं लागू कीं। विभाग में प्रशासनिक सुधार के तहत पदों की संख्या 528 से बढ़ाकर 607 और सहकारी समितियों की संख्या 1800 से बढ़ाकर 6346 की गई। सहकारी बैंकों की शाखाएं 207 से बढ़कर 330 हो गईं। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत आईबीपीएस के माध्यम से 597 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई।
दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 11 लाख से अधिक लोगों को 6957.88 करोड़ ब्याजमुक्त ऋण वितरित किया गया। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना से ग्रामीण महिलाओं को राहत मिली, वहीं माधो सिंह भंडारी सामूहिक खेती योजना से 1235 एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य बनाया गया। राज्य की 670 पैक्स समितियों का कम्प्यूटरीकरण कर सहकारिता को डिजिटल रूप मिला। महिलाओं को सहकारी समितियों में 33ः आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया गया। ठोस रणनीति से सहकारी बैंकों का एनपीए 4838.16 लाख से घटकर 690.30 लाख तक पहुंचा। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी और जवाबदेह सहकारिता के माध्यम से “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” के लक्ष्य को साकार करने हेतु प्रतिबद्ध है।