किसान की आत्महत्या है धामी सरकार के “सुशासन” पर प्रश्नचिन्हं

किसान की आत्महत्या है धामी सरकार के “सुशासन” पर प्रश्नचिन्हं

देहरादून। उधम सिंह नगर के किसान स्वर्गीय सुखवंत सिंह की आत्महत्या केवल एक व्यक्ति की निजी त्रासदी नहीं, बल्कि धामी सरकार के तथाकथित “सुशासन” पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि सिस्टम की बेरुखी और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से टूटकर किसान को जान देनी पड़ी, जो पूरे राज्य को झकझोर देने वाली घटना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर मृतक ने गंभीर आरोप लगाए, उन्हीं के अधीन जांच कराना न्याय का मज़ाक है। इससे निष्पक्षता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। माहरा ने कहा कि सरकार पोस्टरों में सुशासन दिखाती है, जबकि किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। उन्होंने मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और आरोपित अधिकारियों को प्रक्रिया से अलग करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसान की जान इतनी सस्ती है और क्या सरकार में जवाबदेही बची है?

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