देवभूमि है प्रकृति, संस्कृति और कृषि की अनूठी धरोहर: राज्यपाल

कृषि-पारिस्थितिकी-पर्यटन पर दो दिवसीय चिंतन शिविर का राज्यपाल ने किया उद्घाटन

टिहरी गढ़वाल। वीरचंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी में “भारत में कृषि-पारिस्थितिकी-पर्यटन अवसर, चुनौतियाँ और आगे की राह” विषय पर दो दिवसीय चिंतन शिविर का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने दीप प्रज्वलित कर किया। यह आयोजन भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड प्रकृति, संस्कृति और कृषि की अनूठी धरोहर से सम्पन्न है और ऐसे विषय पर गहन मंथन भविष्य की दिशा तय करने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मात्र औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सार्थक पहल है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन केवल मनोरंजन तक सीमित न होकर अब सतत विकास का आधार बन रहा है। इको-टूरिज्म और कृषि-पर्यटन जैसे मॉडल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका और रोजगार को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की आर्थिक रीढ़ है और लगभग 45 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में एग्री-इको-टूरिज्म मॉडल किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत 2722.64 लाख रुपये है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। कुलपति डॉ. परविन्दर कौशल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, प्रतापनगर विधायक विक्रम नेगी, सचिव रविनाथ रमन, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल, एसएसपी आयुष अग्रवाल, सीडीओ वरुणा अग्रवाल सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं प्रोफेसर उपस्थित रहे।

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