
ज्योति रौतेला ने कहा कि प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक पूर्ण न्याय न मिलना, महिलाओं की असुरक्षा, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर गृहमंत्री को ज्ञापन दिया जाना था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आने की खबरों को लेकर निष्पक्ष जांच और उनके इस्तीफे की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी।
रौतेला के अनुसार महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से ज्ञापन देने जा रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें काफी समय तक रोके रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने ज्ञापन लेने की पहल नहीं की। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई, जिसमें रौतेला को हल्की चोटें भी आईं। बाद में उन्हें और उनकी साथियों को ऋषिकेश कोतवाली ले जाया गया।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक संगठनों को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री पूरे देश के हैं और उन्हें उत्तराखंड की जनता से जुड़े मुद्दों को सुनना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठाने का प्रयास करता है, उसे रोक दिया जाता है।
रौतेला ने कहा कि प्रदेश में लगातार बढ़ते अपराध, महिलाओं के खिलाफ घटनाएं, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान अब तक सार्वजनिक न होना भी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि यदि इन ज्वलंत मुद्दों पर सरकार ने गंभीरता से संज्ञान नहीं लिया तो महिला कांग्रेस प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी। इस दौरान आशा मनोरमा शर्मा, उर्मिला ढौंढियाल थापा, अंशुल त्यागी, अंजू मिश्रा, निधि नेगी, अनीता सकलानी, दीपा चौहान, नलिनी दीक्षित सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।