भारत-नेपाल सीमा पर पहली बार हुई कैबिनेट बैठक, धामी सरकार ने लिए 24 बड़े निर्णय

भारत-नेपाल सीमा पर पहली बार हुई कैबिनेट बैठक, धामी सरकार ने लिए 24 बड़े निर्णय


देहरादून/चंपावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को पहली बार राजधानी देहरादून से बाहर भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सीमांत क्षेत्र बनबसा में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। एनएचपीसी बनबसा में हुई इस बैठक के जरिए सरकार ने शासन को राजधानी से दूर सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने का संदेश दिया। बैठक में राज्यहित से जुड़े 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मंत्रिमंडल ने अनुमोदन प्रदान किया। सरकार के अनुसार, सीमांत क्षेत्रों में सीधे पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों, जरूरतों और विकास की संभावनाओं को समझना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
कैबिनेट ने वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों के तकनीकी परीक्षण और ऑनलाइन संरेखण के परीक्षण के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण के कार्यालय में परियोजना प्रबंधन इकाई यानी पीएमयू गठित करने तथा छह पद स्वीकृत करने का निर्णय लिया। वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। लालकुआं और जौनसार-बावर क्षेत्र की भूमि के विनियमितीकरण संबंधी प्रावधानों को भी स्वीकृति मिली।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण के लिए हस्तांतरित परिसंपत्तियों के संबंध में उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को 66.29 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि जारी करने को मंजूरी दी गई। संपत्ति के क्रय-विक्रय में उपलब्ध कराए जाने वाले पैन के सत्यापन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय भी लिया गया। इससे फर्जी या गलत पैन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और रिपोर्टिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कैबिनेट ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। इसके तहत 2026 से 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी के तीन प्रतिशत और कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है। आपदा एवं सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में नियमानुसार अतिरिक्त छूट का प्रावधान रहेगा।
वन विभाग में विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में बदलाव करते हुए मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं और मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल को विभागाध्यक्ष घोषित करने का निर्णय लिया गया। इससे वनाग्नि, बाढ़, दैवीय आपदा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी। छठवें राज्य वित्त आयोग की स्थानीय निकायों से संबंधित संस्तुतियों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने को भी मंजूरी दी गई।
कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी आचरण नियमों को अद्यतन करने, सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे के पुनर्गठन, सिंचाई एवं जल निकासी से संबंधित नए विधेयक को विधानसभा में रखने तथा कुक्कुट आहार सब्सिडी को आधार सीडेड बैंक खातों के माध्यम से डीबीटी से देने के प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली।
युवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में कैबिनेट का महत्वपूर्ण फैसला मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को लेकर रहा। इस योजना से राज्य के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। योजना पर पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के मानकों में भी संशोधन किया गया है।
इसके अलावा टिहरी के नरेंद्रनगर में उप निबंधक कार्यालय की स्थापना, वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली-2026, मेडिकल कॉलेजों में सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट तथा डेमोन्स्ट्रेटर के वेतन-मानदेय के पुनर्निर्धारण सहित कई अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।


अब देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी सरकार: मुख्यमंत्री

देहरादून/चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा। सरकार का प्रयास है कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम हो तथा विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने से स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की आवश्यकताओं को करीब से समझने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र विशेष से जुड़े विषयों पर प्रभावी और त्वरित निर्णय लेने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

देवभूमि की लोक परंपरा की अनमोल धरोहर ‘’फर्रा/छन्तोली’’ भेंट

बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं मंत्रिमंडल के सदस्यों को देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं की अनमोल धरोहर ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई। यह चम्पावत के देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ढाल है। बग्वाल परंपरा में प्रयोग होने वाली यह पारंपरिक ढाल मुख्यतः बांस अथवा रिंगाल की .खपच्चियों से छतरीनुमा आकार में तैयार की जाती है। मुख्यमंत्री एवं कैबिनेट मंत्रियों को यह पारंपरिक धरोहर भेंट किया जाना देवभूमि की लोक संस्कृति, परंपराओं और सीमांत क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के सम्मान का प्रतीक रहा।

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