लोक-परलोक के भोगों से विरक्ति ही है वास्तविक संन्यास: शंकराचार्य

लोक-परलोक के भोगों से विरक्ति ही है वास्तविक संन्यास: शंकराचार्य


देहरादून/वाराणसी। काशी स्थित श्रीविद्या मठ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का 24वां संन्यास दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में उन्होंने संन्यास की गहन व्याख्या करते हुए कहा कि केवल वस्त्र परिवर्तन नहीं, बल्कि लोक-परलोक के समस्त भोगों से पूर्ण विरक्ति ही वास्तविक संन्यास है।
उन्होंने कहा कि संन्यासी का कर्तव्य केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को सन्मार्ग दिखाना और सनातन मूल्यों की स्थापना करना भी है। कार्यक्रम में वेदपाठ, पूजन-अर्चन और शांति पाठ से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। इस दौरान विभिन्न संतों, आचार्यों और भक्तों ने अपने विचार व्यक्त किए तथा गौ संरक्षण व धर्म रक्षा के संकल्प को दोहराया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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