लोकल से वोकल, केवल नारा नहीं, बल्कि है सामाजिक दायित्व

लोकल से वोकल, केवल नारा नहीं, बल्कि है सामाजिक दायित्व


उत्तरकाशी। जब राजनीतिक मंच केवल भाषणों तक सीमित न रहकर सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनते हैं, तब लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं। उत्तरकाशी में भाजपा जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष ललिता सेमवाल द्वारा शुरू की गई ’लोकल से वोकल’ की पहल इसका सशक्त उदाहरण है। बैठकों और सम्मेलनों में स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित अरसा, रोटाना और स्थानीय उत्पादों की गिफ्ट टोकरी को अपनाने का निर्णय ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक संबल और सम्मान दे रहा है।
प्रदेश की वरिष्ठ नेत्री नेहा जोशी को स्थानीय उत्पाद भेंट कर अभियान की शुरुआत यह दर्शाती है कि नेतृत्व जब स्थानीयता से जुड़ता है, तो नीति और जमीन के बीच की दूरी मिटती है। गायत्री महिला स्वयं सहायता समूह, जोशियाड़ा की बहनों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि छोटा प्रोत्साहन भी बड़े बदलाव की नींव रखता है। ललिता सेमवाल की यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रेरक कदम है।

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