आईआईटी रुड़की ने विकसित किया नैनो-सक्षम नवाचार

आईआईटी रुड़की ने विकसित किया नैनो-सक्षम नवाचार


हरिद्वार। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने बहु-पोषक नैनोफॉस्फेट कण विकसित किए हैं, जो जल में पाए जाने वाले विषैले फ़्थेलेट्स जैसे प्लास्टिक योजकों को तेज़ी से हटाने में सक्षम हैं। ये नैनोकण सूक्ष्म पोषक-भंडार के रूप में कार्य करते हैं और फॉस्फ़ोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम तथा अन्य सूक्ष्मधातु तत्वों को जीवाणुओं को आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे मुहैया कराते हैं। इस प्रक्रिया से फ़्थेलेट्स का तीन घंटे के भीतर लगभग पूर्ण निष्कासन संभव होता है, भले ही जल पोषक-तत्वों से वंचित हो।
परंपरागत पोषक माध्यमों के विपरीत, नैनोफॉस्फेट द्वितीयक प्रदूषण उत्पन्न नहीं करते और जीवाणु चयापचय को निरंतर ऊर्जा प्रदान करते हैं। शोध में दिखाया गया कि जीवाणु नैनोकणों पर उपनिवेश बनाकर पोषक तत्वों का नियंत्रित उपयोग करते हैं, जिससे जल में यूट्रोफिकेशन की समस्या नहीं आती। इस तकनीक ने नल जल, नदी जल और कृत्रिम अपशिष्ट जल में प्रभावी परिणाम दिए। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत के अनुसार, यह नवाचार वैश्विक जल और पर्यावरणीय सततता चुनौतियों का विज्ञान-आधारित समाधान प्रस्तुत करता है और जल पुनर्स्थापन, प्रदूषक विघटन और जैव-पुनर्स्थापन में नई संभावनाएँ खोलता है।

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