मुख्यमंत्री के गृह जनपद में किसान की आत्महत्या सरकार की प्रशासनिक विफलता: करन माहरा

मुख्यमंत्री के गृह जनपद में किसान की आत्महत्या सरकार की प्रशासनिक विफलता: करन माहरा


उधमसिंह नगर। किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या की खबर अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता और कानून व्यवस्था की गंभीर कमी के रूप में बताया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के गृह जनपद में एक किसान न्याय की तलाश में अपनी जमीन की रक्षा की लड़ाई लड़ता रहा, लेकिन उसे प्रशासन से राहत नहीं, बल्कि अपमान, धक्के और गाली-गलौज मिली।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। पुलिस और सरकारी संस्थाएं संवेदनहीन हो गई हैं। किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या इसी भ्रष्ट तंत्र और सड़े हुए प्रशासन की प्रत्यक्ष तस्वीर है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले हरिद्वार में पुलिस अभिरक्षा में हिस्ट्रीशीटर की हत्या की घटना हुई थी, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। राज्य में बढ़ते भूमि घोटालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। करन माहरा ने कहा कि कांग्रेस हर नागरिक के साथ खड़ी है और प्रदेश में न्याय सुनिश्चित कराने के लिए आवाज बुलंद करती रहेगी। कांग्रेस ने किसान सुखवंत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

प्रदेश में चरमरा चुकी है कानून व्यवस्था

देहरादून। काशीपुर निवासी 40 वर्षीय किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या केवल व्यक्तिगत जतंहमकल नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के कुशासन और पुलिस-प्रशासन की विफलता का परिणाम है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के गृह जनपद में न्याय न मिलने और जमीन के नाम पर ठगी के चलते किसान ने अपनी पत्नी और पुत्र के सामने जान दे दी। कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है और भ्रष्टाचार आम जनता को न्याय के लिए भटकने पर मजबूर कर रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

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